Sunday, 9 October 2011

मलाईदार विभागों के अफसर नहीं गए विदेश


40 में से 24 पीसीएस अफसर अमेरिका रवाना
महिला अफसरों ने भी जाने से किया इनकार


स्थान - अमौसी एयरपोर्ट, समय- सायं छह बजे . दिन - रविवार .. 24 पीसीएस अफसर अमेरिका जाने के लिए पूरी तैयारी के साथ हवाई जहाज में सवार होने के लिए कर रहे इंतजार! परदेश जा रहे अफसरों की तैयारी बिलकुल देशी तरीके वाली! किसी के बैग में देशी घी के लड्डू तो कोई लइया-चना से लेकर सत्तू तक साथ में लिए जा रहा है! मगर यह क्या? ट्रेनिंग के लिए अमेरिका जा रहे 40 अफसरों के बैच में सिर्फ 24 अफसर ही एयरपोर्ट पहुंचे। माजरा न जाने वाले अफसरों के मलाईदार विभागों से समझ में आया। सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि पुरुष पीसीएस अफसर तो पुरुष ठहरे किंतु मलाईदार विभागों से जुड़ीं दो महिला अफसरों ने अमेरिका जाने से इनकार कर दिया।

यूपी एकमात्र ऐसा राज्य है जहां पीसीएस अफसरों को विदेश में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। मजे की बात यह है कि विदेश प्रशिक्षण का कार्यक्रम मायावती सरकार ने ही शुरू किया था। इससे भी बड़ी दिलचस्प बात यह है कि यूपी का ही एक रिटायर्ड आईएएस अफसर अमेरिका में पीसीएस अफसरों को गुड गर्वनेंस के गुर सिखाता है और बदले में राज्य सरकार से करोड़ों ऐंठता है। ट्रेनिंग में 20 वर्ष की सेवा कर लेने वाले अफसर ही जाते हैं। रविवार सायं छह बजे अमौसी एयरपोर्ट से 24 पीसीएस अफसरों का दल रवाना हो गया। अफसर पहले दिल्ली जाएंगे फिर रविवार रात 12 बजे फ्लाइट पकड़ कर ड्यूक सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट डरहम अमेरिका पहुंचेंगे।

जानकारी के अुनसार प्रशिक्षण के दौरान पीसीएस अफसरों को अमेरिका द्वारा एक्सपोजर विजिट भी कराई जाएगी। प्रशिक्षण 10 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक चलेगा। नवंबर 2007 में 40 अफसरों का पहला बैच विदेश प्रशिक्षण के लिए गया था। अब तक 200 अफसरों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जा चुका है। इस बार भी 40 अफसरों को प्रशिक्षण के लिए अमेरिका जाना था मगर 24 अफसर ही जाने के लिए तैयार हुए। सूत्रों का कहना है कि 16 उन अफसरों ने अमेरिका जाने से इनकार कर दिया जो मलाईदार विभागों से जुड़े हैं। मसलन कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ओएन सिंह, गाजियाबाद के नगर आयुक्त बसंत लाल गुप्ता, यमुना एक्सप्रेस वे नोएडा के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरके सिंह, ग्रेटर नोएडा के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीसी गुप्ता समेत 16 अफसरों ने अमेरिका जाने से इनकार कर दिया। पीसी गुप्ता का नाम लगातार तीसरी बार विदेश जाने के लिए भेजा गया मगर वे नहीं गए। श्री गुप्ता कैबिनेट सचिव के करीबी बताए जाते हैं। इसके अलावा यह पहला बैच है जिसमें कोई महिला अफसर नहीं जा रही है। संयुक्त आवास आयुक्त शकुंतला गौतम और महिला कल्याण विभाग की संयुक्त सचिव भावना श्रीवास्तव ने विदेश जाने से साफ-साफ मना कर दिया। पीसीएस संवर्ग के अफसरों में यह जबरदस्त चर्चा है कि अमेरिका न जाने के पीछे उनकी मंशा साफ है और वे तथाकथित वसूली के चक्कर में इतना बड़ा मौका छोड़ रहे हैं। पीसीएस अफसर व आईएएस अधिकारी विजय शंकर पांडेय के भाई अजय शंकर का अमेरिका जाने से इनकार किए जाने का मामला भी पंचम तल से जोड़ कर देखा जा रहा है।

राज्य सरकार पीसीएस अफसरों के प्रशिक्षण पर करोड़ों रुपए खर्च करती है मगर इसके बावजूद कई एक अफसर जाने से मना कर देते हैं। नियुक्ति विभाग के सयुंक्त सचिव योगेश्वर राम ने बताया कि एक अफसर के विदेश में प्रशिक्षण पर ढाई से तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। 71 हजार रुपए तो टिकट का ही लग जाता है। डेढ़ लाख रुपए ट्यूशन पर खर्च होते हैं।

भ्रष्टाचार के पुराने पुरोधा हैं निदेशक

पंचायतीराज विभाग के निदेशक ने पत्नी की कम्पनी को मालामाल किया
लखनऊ। पंचायतीराज विभाग में भ्रष्टाचार का मकड़जाल बुनने वाले निदेशक व विशेष सचिव डीएस श्रीवास्तव के हाथ बहुत पहले से ही भ्रष्टाचार के कीचड़ में सने हैं। यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन में तत्कालीन प्रबंध निदेशक व आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विशेष सचिव साहब ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न सिर्फ अपनी पत्नी की संस्था मे. इन्नोटेक इन्फोकॉम सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंचाया बल्कि कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 33,04,800 रुपए के फर्जी भुगतान का षड्यंत्र भी रचा था। तत्कालीन प्रबंध निदेशक व मौजूदा पंचायतीराज निदेशक को वित्तीय अनियमितता व अपने पद के दुरुपयोग के चलते 21 दिसंबर 2009 को निलंबित कर दिया गया था।

पीसीएस संवर्ग के 1979 बैच के अफसर दया शंकर श्रीवास्तव को तत्कालीन राज्यपाल ने 21 दिसंबर 2009 को यह कहते हुए निलंबित कर दिया था कि उन्होंने झूठ बोला कि मे. इन्नोटेक इन्फोकॉम सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी से उनकी पत्नी श्रीमती शशी श्रीवास्तव का कोई लेना-देना नहीं है। जबकि उनकी पत्नी कम्पनी में निदेशक थीं। शासन की नीतियों के विरुद्ध अपनी पत्नी की संस्था को 2.50 करोड़ की धनराशि से खोले गए कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्रों को उन्होंने हस्तांतरित कर दिया। 2.50 करोड़ का सम्यक उपयोग भी नहीं किया गया। मौजूदा पंचायतीराज निदेशक व इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन लि. के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने विभिन्न विभागों के ई-टेंडरिंग से सम्बंधित कार्यो का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन लि. के बजाय मे. इन्नोटेक इन्फोकॉम सोल्यूशन प्राइवेट लि. को करा कर वित्तीय अनियमितताएं की थीं। यही नहीं तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने अपनी पत्नी की संस्था को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण हेतु पूर्व में बनाई गई सभी फ्रेंचाइजीज को बंद कर बनाई गई नई फ्रेंचाइजी मे. इन्नोटेक कम्पनी को भुगतान किए जाने का नियम विरुद्ध आदेश भी दिया। कम्प्यूटर प्रशिक्षण से प्राप्त होने वाली आय का 95 प्रतिशत भाग अपनी पत्नी की कम्पनी के पक्ष में तथा पांच प्रतिशत भाग यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन लि. के पक्ष में देने का आदेश 22 दिसंबर 2008 को किया था। इसके अलावा शासकीय विभागों से 33,04,800.00 रुपए का फर्जी भुगतान अपनी पत्नी की कम्पनी को कराए जाने का षड्यंत्र भी तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने रचा था। नियुक्ति विभाग ने राज्यपाल की ओर से 21 दिसंबर 2009 को जारी अपने आदेश में निलंबन की सजा डीएस श्रीवास्तव को सुनाई थी। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव व जांच अधिकारी कुंवर फतेह बहादुर सिंह ने कहा था कि मे. इन्नोटेक इन्फोकॉम सोल्यूशन प्राइवेट लि. कम्पनी श्रीमती शशी श्रीवास्तव के नाम से रजिस्ट्रार कम्पनी के आफिस में 11 दिसंबर 2008 को पंजीकृत हुआ है। इसमें डीएस श्रीवास्तव की पत्नी निदेशक हैं। प्रमुख सचिव ने इस प्रकरण में श्री श्रीवास्तव द्वारा शासन को झूठी सूचना देने का दोषी पाया था।गोयल को मुक्त नहीं कर रहे मीना

लखनऊ। पंचायतीराज विभाग का बेड़ा गर्क करने में और कई अफसर फुरसत के साथ जुटे हैं। एक विशेष सचिव ऐसे हैं कि उनका पिछले 29 सितंबर को ही विभाग से ट्रांसफर हो गया था। मगर उनकी योग्यता और कमर्ठता को देखते हुए विभाग के प्रमुख सचिव बीएम मीना ही उन्हें कहीं और नहीं जाने देना चाहते हैं। विभाग के विशेष सचिव राजेन्द्र कुमार गोयल ट्रांसफर होने के बावजूद न तो जाना चाहते हैं और न ही उन्हें विभाग के मुखिया मीना साहब जाने देने की इजाजत दे रहे हैं।

Wednesday, 5 October 2011

‘40 परसेंट कमीशन मांग रहे हैं विशेष सचिव’

शिकायतकर्ता के पास कमीशन मांगने वाली ऑडियो सीडी
कमीशन मांगने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
 पंचायतीराज विभाग में सिर्फ एक ही डीएस श्रीवास्तव नहीं हैं बल्कि ऐसे कइयों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। विभाग के एक दूसरे विशेष सचिव व बीआरजीएफ का कामकाज देख रहे राजेन्द्र गोयल ने तो कमीशन लेने की खातिर सारी हदें ही पार कर दीं। उन्होंने क्षमता विकास कार्यक्रम के तहत कराए गए प्रशिक्षण कार्य में सेवा प्रदाता एजेंसियों से खुलेआम डेढ़ करोड़ रुपए कमीशन मांगा है। खुल्लम-खुल्ला 40 प्रतिशत कमीशन मांगने की बात अब हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में वह ऑडियो सीडी भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत की है जिसमें विशेष सचिव गोयल साहब 40 परसेंट कमीशन एडवांस मांग रहे हैं।

याचिकाकर्ता इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरप्राइज साइंस इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट ने पंचायतीराज विभाग के विशेष सचिव व बीआरजीएफ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजेन्द्र गोयल के खिलाफ न सिर्फ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में कमीशन लेने व अन्य भ्रष्टाचार सम्बंधी याचिका प्रस्तुत की है बल्कि मुख्यमंत्री मायावती से भी इसकी शिकायत की है। मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में शिकायतकर्ता संस्था ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि में करोड़ों रुपए राज्य को मिल रहा है। वर्तमान में इस योजना को विशेष सचिव एवं परियोजना निदेशक राजेन्द्र गोयल देख रहे हैं। विशेष सचिव परियोजना के तहत काम कर रहीं सेवा प्रदाता एजेंसियों को काम के एवज में अभी तक आंशिक रूप से ही धन का भुगतान किया गया है। जब सेवा प्रदाता एजेंसियों ने पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव बीएम मीना से इस बाबत सम्पर्क किया तो उन्होंने श्री गोयल से मिलकर उनके द्वारा बताई गई शर्तो के अनुसार कार्य करने के लिए कहा। एजेंसी द्वारा यह आरोप लगाने से साफतौर पर स्पष्ट हो जाता है कि प्रमुख सचिव भी कहीं न कहीं इस मामले में लिप्त हैं। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता एजेंसी ने प्रमुख सचिव को भी पार्टी बनाया है।

बीआरजीएफ के तहत क्षमता विकास में कराए गए प्रशिक्षण कार्य व अन्य कार्यो का शेष भुगतान 3,05,32,115.00 रुपए के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी के संचालक ने जब विशेष सचिव राजेन्द्र गोयल से इस सम्बंध में बात करने गए तो उन्होंने 40 प्रतिशत यानि लगभग डेढ़ करोड़ रुपए कमीशन एडवांस देने की शर्त रखी। शिकायतकर्ता ने कहा कि श्री गोयल ने काफी अनुरोध के बावजूद भी 40 प्रतिशत कमीशन की जिद नहीं छोड़ी और कहा कि इसके बगैर संभव नहीं है। मुख्यमंत्री मायावती और कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में भी शिकायतकर्ता ने कहा है कि उसके पास श्री गोयल से हुई वार्ता की ऑडियो सीडी तैयार की गई है। हाईकोर्ट में तो उसने ऑडियो सीडी प्रस्तुत भी की है। मुख्यमंत्री को अगर जरूरत होगी तो ऑडियो सीडी प्रस्तुत कर दी जाएगी। वहीं बीआरजीएफ के लंबित तीन करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि में सेवा प्रदाता एजेंसियों से 40 प्रतिशत कमीशन मांगने तथा अन्य भ्रष्टाचार के आरोपों पर जब डीएनए ने विशेष सचिव राजेन्द्र गोयल से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने कहा कि इस तरह वे कोई जवाब नहीं देंगे। आप शासन में आकर बात कीजिए। सेवा प्रदाता एजेंसी द्वारा प्रमुख सचिव पर लगाए गए आरोपों के सम्बंध में बीएम मीना ने कहा कि मैं सभी आरोपों का जवाब दूंगा।

Tuesday, 4 October 2011

कंप्यूटरीकरण के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल!


821 विकासखंडों को कंप्यूटरीकृत करने का नया खाका तैयार
पंचायतीराज डायरेक्टर समेत अफसरों के दफ्तर होंगे हाईटेक

पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव बीएम मीना को यह नहीं मालूम कि कंप्यूटरीकरण के नाम पर पैसे कहां से आ रहे हैं? कहां खर्च हो रहा है? वे कहते हैं उन्हें कुछ भी नहीं मालूम। लगता है कि निदेशक डीएस श्रीवास्तव का पंचायतीराज विभाग में अखंड राज चल रहा है। निदेशक साहब पिछले चार सालों से तीनों पंचायतों को हाईटेक बनाने में जुटे हुए हैं मगर आज तक एक भी ग्राम पंचायत में एक अदद कंप्यूटर तक खरीद कर नहीं लगा पाए। 12 वें वित्त आयोग से कंप्यूटर के लिए मिले 62 करोड़ से भी ज्यादा रकम को शुद्ध पानी और सफाई के नाम से सफाचट कर गए तो राष्टीय ग्राम स्वरोजगार का पैसा क्षेत्र पंचायतों में कंप्यूटर लगाने के नाम पर डकार गए। अब फिर से कंप्यूटरीकरण के लिए भ्रष्टाचार का तानाबाना बुनने में जुट गए हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार पंचायतीराज विभाग ने पंचायतीराज संस्थाओं के कंप्यूटरीकरण के लिए 51,914 ग्राम पंचायतें, 821 क्षेत्र पंचायतें तथा 72 जिला पंचायतों के अलावा 72 जिला पंचायतराज अधिकारी, 18 मंडलीय उपनिदेशक, राज्य स्तर पर जिला पंचायत अनुश्रवण कोष्ठक, परियोजना प्रबंध इकाई पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि तथा निदेशक पंचायतीराज का दफ्तर कंप्यूटरीकरण से लैश होगा। जानकारी के अनुसार प्रथम चरण में पांच हजार से अधिक जनसंख्या की ग्राम पंचायतों में एमजी नरेगा से कंप्यूटरीकरण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। क्षेत्र पंचायत कार्यालयों में कंप्यूटरीकरण के लिए यूनीवर्सल सर्विस औबलिगेशन फंड से योजना अफसरों ने तैयार की है। इस सम्बंध में 16 सितंबर 2009 को बीएसएनएल एवं एचसीएल के मध्य एक समझौता हुआ है जिसकी वैधता की तिथि 19 जनवरी 2017 तक है।

पता चला है कि पंचायतीराज विभाग के अफसरों की बीएसएनएल के सहायक प्रबंधक इन्द्रमणि से बातचीत भी हो चुकी है कि कंप्यूटरीकरण के लिए बीएसएनएल द्वारा देय कनेक्टिविटी 512 केबीपीएस है। विकास खंड स्तर पर बढ़ते दायित्वों को देखते हुए एक एमबीपीएस की स्पीड के साथ अनलिमिटेड डाउनलोड की आवश्यकता हो सकती है। अफसरों ने विकासखंडवार कंप्यूटरीकरण का जो खर्च निकाला है उसके मुताबिक प्रति विकास खंड में अगर तीन साल का प्लान तैयार किया जाएगा तो 96,689 रुपए और अगर प्रति विकास खंड में पांच साल का प्लान बनाया जाएगा तो 1,13,658 रुपए खर्च आएगा। अफसरों ने 821 विकासखंडों में कंप्यूटरीकरण के लिए तीन साल के प्लान के मुताबिक कुल 7,93,81, 669 रुपए का बजट बनाया है तथा इन्हीं विकासखंडों में पांच साल के प्लान का हिसाब कुल 9,33,13,218 रुपए का निकाला है।

एक-दो नहीं, अब छह परसेंट दो बाबा


सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान में प्रशासनिक मद के पैसों पर अफसरों की नजर

जनता से जुड़ी योजनाओं पर पैसा बाद में स्वीकृत होता है मगर अफसर धन ऐंठने की जुगलबंदी पहले से ही शुरू कर देते हैं। पंचायतीराज विभाग में कुछ इसी प्रकार की ही तस्वीर दिखाई पड़ती है। केंद्र द्वारा संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के पैसों से जिला परियोजना समन्वयक की तैनाती, वेतन एवं अन्य भत्तों की व्यवस्था प्रशासनिक मद से कर ली गई। सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत ही प्रशासनिक मद के नाम से एक परसेंट का बैंक ड्राफ्ट भी भेजने का निर्देश सभी डीपीआरओ को दे दिए गए। मगर इतने से भी तसल्ली नहीं हुई तो पंचायतीराज निदेशक डीएस श्रीवास्तव ने दो प्रतिशत धन का बैंक ड्राफ्ट भेजने का दूसरा आदेश भी जारी कर दिया। मगर अब वह कह रहे हैं कि प्रशासनिक मद में धन ही उपलब्ध नहीं है लिहाजा इस परियोजना लागत का छह प्रतिशत धन राज्य स्तर पर उपलब्ध होना चाहिए।

विभाग के सूत्रों के अनुसार निदेशक डीएस श्रीवास्तव ने 12 जुलाई 2011 को समस्त डीपीआरओ को पत्र लिखकर कहा था कि 31 मार्च 2009 में विमान व्यवस्था के क्रम में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत अनुमन्य पांच प्रतिशत प्रशासनिक मद की धनराशि से एक प्रतिशत धन का बैंक ड्राफ्ट स्टेट सैनिटेशन एण्ड हाइजिन एजूकेशन सेल के नाम तैयार कर निदेशालय को उपलब्ध कराएं। इसके पीछे निदेशक व विशेष सचिव ने यह तर्क दिया कि सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत जिला परियोजना समन्वयक की तैनाती सेवा प्रदाता वीबग्योर एजेंसी के माध्यम से की गई है। इनके वेतन एवं भत्ते का भुगतान सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के प्रशासनिक मद से ही वहन किया जाना है। इसलिए राज्य स्वच्छता मिशन द्वारा प्रशासनिक मद की धनराशि को एक प्रतिशत के स्थान पर दो प्रतिशत धनराशि जिलों से राज्य स्तर पर प्राप्त किए जाने का निर्णय लिया गया है। जबकि इसके ठीक विपरीत विभाग के कुछ अफसरों व कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री मायावती को पत्र लिख कर निदेशक के विरुद्ध यह आरोप लगाया है कि वीबग्योर एजेंसी के माध्यम से दो लाख रुपए प्रति व्यक्ति से रिश्वत लेकर 70 से भी अधिक लोगों की नियुक्तियां की गई हैं।

पंचायतीराज विभाग में प्रशासनिक मद के पैसों की चाहत अफसरों में किस प्रकार होती है इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि 30 मार्च 2011 को प्रस्तुत की जाने वाली सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान की समीक्षात्मक टिप्पणी में साफ-साफ कहा गया कि प्रदेश स्तर पर प्रशासनिक मद में धनराशि उपलब्ध न होने के कारण योजना के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन में कठिनाइयां व्याप्त है। इसलिए परियोजना लागत का छह प्रतिशत अंश प्रशासनिक मद के रूप में राज्य स्तर पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे तो यही लगता है कि अधिकारी विकास योजनाओं में भले ही रुचि न रखते हों मगर वे प्रशासनिक मद के रूप में मिलने वाले धन के लिए जरूर व्याकुल रहते हैं। शायद इसीलिए खासकर पंचायतीराज विभाग में यह शिकायतें भी ज्यादा तादाद में हैं कि जिला परियोजना समन्वयकों की नियुक्ति का मामला हो या फिर स्वच्छता कार्यक्रम में अवैध ढंग से विकास खंडों में कम्प्यूटर आपरेटरों की नियुक्ति हो सभी में प्रशासनिक मद का पैसा खर्च होने के बावजूद रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। प्रशासनिक मद में खर्च किए जाने वाले पैसों के बाबत डीएनए ने निदेशक डीएस श्रीवास्तव से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया और न ही एसएमएस का कोई जवाब दिया। प्रशासनिक मद के बारे में व्यय किए जा रहे पैसों को लेकर प्रमुख सचिव बीएम मीना ने अनभिज्ञता जाहिर की तथा कहा कि निदेशक की बात निदेशक ही जानें।

डीपीआरओ की तैनाती में उगाही कर रहे निदेशक!


कृषि एवं ग्राम्य विकास संस्थान ने की प्रमुख सचिव से शिकायत
पंचायतीराज विभाग के निदेशक व विशेष सचिव डीएस श्रीवास्तव पर अब जिलों में पैसे लेकर डीपीआरओ की नियुक्तियां करने का भी आरोप लगने लगा है। झूंसी इलाहाबाद की संस्था कृषि एवं ग्राम्य विकास संस्थान की मंत्री अनीता ने प्रमुख सचिव से शिकायत की है कि जिला पंचायतराज अधिकारियों की जिला स्तर पर नियमों के विपरीत तैनाती में धन उगाही की जा रही है। शासन के उच्च अफसरों को संज्ञान में लाए बिना निदेशक मनमाने फैसले ले रहे हैं।
संस्थान ने विभाग के प्रमुख सचिव को लिखे शिकायती पत्र में कहा है कि जिला पंचायतराज अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 72 है। 72 पदों में लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के 36 पदों से स्पष्ट है कि पदोन्नति के जरिए पदों के भरे जाने की अनुमन्यता के सापेक्ष सहायक विकास अधिकारी के कुल 32 पदों के विपरीत 46 पदों पर पूर्व से ही प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारी बनाए गए हैं। जबकि सहायक जिला पंचायतराज अधिकारी तकनीकी के लिए अनुमन्य चार पदों के सापेक्ष 14 पदों पर तैनाती की गई है। इस प्रकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) संवर्ग से 14 तथा सहायक जिला पंचायत अधिकारी तक संवर्ग से 10 अधिक पदों पर प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारी तैनात हैं। इससे स्पष्ट है कि पूर्व से ही स्वीकृत जिला पंचायतराज अधिकारियों के पदों के विपरीत 24 अधिकारी अधिक प्रभारी बनाए गए हैं। संस्थान के मंत्री ने कहा है कि प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारियों के अलावा निदेशक ने अंबेडकरनगर में अनिल कुमार सिंह को कनिष्ठ सहायक विकास अधिकारी एवं गोरखपुर में अति कनिष्ठ ग्राम पंचायत अधिकारी आरके भारती को प्रभारी जिला पंचायत अधिकारी बनाया है। कृषि एवं ग्राम्य विकास संस्थान ने कहा है कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार के अलावा सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान में भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के समस्त बीपीएल परिवारों तथा 10 प्रतिशत एपीएल परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय से आच्छादित करने के लिए प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। इसमें प्रति शौचालय निर्धारित धनराशि 2640 है जबकि डॉ. अंबेडकर ग्रामों में प्रदेश सरकार द्वारा 4940 जिसमें 4540 रुपए अनुदान तथा 400 लाभार्थी अंश है। राज्य स्तर से जारी शासनादेश व भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार शौचालय की धनराशि लाभार्थियों के खाते में जानी चाहिए। किंतु शासनादेश के विपरीत जनपद स्तर के शौचालय सेट की धनराशि काटकर पंचायत उोगों को दी जा रही है।
लाभार्थी को कोई भी धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। संस्थान ने कहा है कि पंचायत उोगों को निदेशक द्वारा अधिकृत करते हुए अग्रिम में कमीशन वसूला जा रहा है। डा. अंबेडकर गांवों में फिर भी कुछ शौचालय बनाए जा रहे हैं मगर नॉन अंबेडकर गांवों में व्यापक स्तर पर हेराफेरी की जा रही है। संस्थान ने फर्जी प्रगति रिपोर्ट भेजे जाने का भी आरोप लगाया है। निदेशक द्वारा जिलों में नियमों के विपरीत डीपीआरओ की तैनाती पर 28 फरवरी 2011 को की गई शिकायत तथा धन उगाही के मामले में प्रमुख सचिव बीएम मीना ने कहा कि मैं तो उस समय विभाग में नहीं था। पता नहीं उस समय इसकी जांच क्यों नहीं की गई? मगर मैं इसे देखूंगा।

Tuesday, 20 September 2011

कांशीराम स्वरोजगार योजना में घपला


सही आंकड़े नहीं दे रहे जिलों के अफसर

सूबे की मुखिया मायावती की शीर्ष प्राथमिक योजनाओं पर भी बट्टा लगाने से भ्रष्ट अफसर नहीं चूक रहे हैं। कांशीराम जी अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग व अल्पसंख्यक वित्तीय विकास निगम के अधिकारियों ने भारी पैमाने पर गोलमाल किया है। दर्जनों जिलों में लाभार्थियों की संख्या और उन्हें दिए गए धन की सूचना ही विशेष सचिव को नहीं है। कई जिलों में मान्यवर कांशीराम जी अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना का पैसा भी जरूरमंदों को नहीं मिला है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सूत्रों का कहना है कि मान्यवर कांशीराम जी अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में जमकर धांधली की गई है। जिलों में भारी कमियां पाई गईं हैं। इस योजना में जिलों के अफसरों ने विशेष सचिव को सही आंकड़े ही नहीं भेजे हैं। अफसरों की हीलाहवाली की वहज से ही कानपुर, उन्नाव, झांसी, बाराबंकी आदि जिलों में वर्ष 2009 में किसी को भी योजना का लाभ नहीं दिया गया है। योजना में भारी गोलमाल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2011-12 में एटा, अंबेडकरनगर, कानपुर में लाभार्थियों की संख्या एवं वितरित धनराशि का विवरण ही जिले के अफसरों ने विशेष सचिव शहाबुद्दीन मोहम्मद को नहीं भेजा है। यही नहीं जिन जिलों में लाभार्थियों की संख्या एवं व्यय धन की सूचना विशेष सचिव को भेजी है वहां के लाभार्थियों के नाम, पते व वितरित धनराशि आदि की सूचना तथा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों के पत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इस प्रकार बड़ी मात्रा में पैसों का घपला किया गया है। इन जिलों में महामाया नगर, अलीगढ़, मैनपुरी, कांशीरामनगर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, इलाहाबाद, कौशाम्बी, संतकबीरनगर, बहराइच, फैजाबाद, सुलतानपुर, कुशीनगर, जालौन, इटावा, फरुखाबाद, कन्नौज, औरैया, हरदोई, मेरठ, बागपत, गौतमबुद्धनगर, मिर्जापुर, गाजीपुर, चन्दौली और जौनपुर शामिल हैं।

विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009-10 में आगरा में पांच लाभार्थियों को 0.38 लाख, झांसी में 16 लाभार्थियों को 1.08 लाख, फिरोजाबाद में सात लाभार्थियों को 0.49 लाख, बिजनौर में 58 लाभार्थियों को 4.35 लाख, बदायूं में 23 लाभार्थियों को 1.60 लाख, एटा में 12 लाभार्थियों को 0.71 लाख, अंबेडकर नगर में चार लाभार्थियों को 0.30 लाख, बस्ती में 13 लाभार्थियों को 0.95 लाख, बरेली में 26 लाभार्थियों को 1.80 लाख, लखनऊ में 30 लाभार्थियों को 2.17 लाख, सहारनपुर में 78 लाभार्थियों को 5.51 लाख, सिद्धार्थनगर में 11 लाभार्थियों को 0.83 लाख रुपए दिया गया है।

मान्यवर कांशीराम जी अल्पसंख्यक योजना का पैसा बेरोजगारों को कई जिलों में वर्ष 2010 में भी नहीं मिला है। इनमें झांसी, फिरोजाबाद, बिजनौर, एटा, बस्ती व लखनऊ प्रमुख रूप से शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव शहाबुद्दीन मोहम्मद ने अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम लि. के प्रबंध निदेशक को इस सम्बंध में पत्र लिखा है कि भारी कमियों को दूर किया जाय तथा मान्यवर कांशीराम जी अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में परियोजना लागत एवं अनुदान राशि बढ़ाए जाने सम्बंधी प्रकरण में संशोधित सूचना व अभिलेख सहित पुनरीक्षित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराएं। अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में व्यापक गड़बड़ियों के बाबत डीएनए संवाददाता ने जब विशेष सचिव शहाबुद्दीन मोहम्मद से पूछा तो उन्होंने बहाना बताते हुए कहा कि वे कहीं और बैठे हैं और सम्बंधित अधिकारी से जानकारी कर ही बता पाएंगे।